लेख: एलियन-यू.एफ.ओ. रहस्य

हमारा आकाश बहुत सारी रोचक घटनाओं से भरा है और इसी आकाश में कई बार एसी चीजों को देखे जाने के दावे किये जाते हैं जिनकी तात्कालिक तौर पर किसी ज्ञात वस्तु या घटना के रूप में पहचान नहीं की जा सकती और इस प्रकार आसमान में दिखाई देने वाली इन अज्ञात चीजों को U.F.O. (Unidentified Flying Objects) कहा जाता है अर्थात आसमान में उड़ने वाली उन अज्ञात वास्तुओ अथवा ऑप्टिकल घटनाओं को यू.एफ.ओ. कहते हैं जिनकी तात्कालिक तौर पर किसी प्राकृतिक या मानव निर्मित वस्तु जैसे हवाई जहाज, हेलिकॉप्टर, मौसमी गुब्बारे, सॅटॅलाइट, उपग्रह, पतंग या किसी अन्य ज्ञात वस्तु के रूप में पहचान नहीं की जा सकती। और वो यू.एफ.ओ. जिनकी बाद में किसी मानव-निर्मित वस्तु या प्राकृतिक वस्तु या घटना के तौर पर पहचान कर ली जाती हो उसे आई.एफ.ओ. (Identified Flying Objects) कहा जाता है।

 

नोट यह लेख विज्ञान-प्रगति में प्रकाशित अंक से लिया हुआ है. (लेखक रामकृष्ण वैष्णव)

“क्या हम अकेले हैं?” यह मानव जगत का सबसे बड़ा प्रश्न/रहस्य है जिसे कि अभी तक सुलझाया नहीं जा सका है। कई देश ब्रह्माण्ड के रहस्य सुलझा कर ऐसे ग्रहों की खोज में लगे हैं जहां जीवन की सम्भावना हो सके। नासा, इसरो सहित दुनियां की कई संस्थाएं अन्य ग्रहों पर जीवन के सबूतों को ढूंढ रही है क्योंकि किसी अन्य ग्रह पर जीवन की खोज कर लेना मानव इतिहास की सबसे बड़ी खोज एवं उपलब्धि होगी। कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि अन्य ग्रहों पर भी जीवन हो सकता है और पृथ्वी के आलावा कहीं और भी बुद्धि-जीवी (एलियन) हो सकते हैं और कुछ का तो यहाँ तक कहना है कि वो धरती पर भी आते रहते हैं जबकि कुछ अन्य वैज्ञानिक इन सब बातों से इनकार करते रहे हैं लेकिन सच तो यही है कि दुनिया के सबसे बड़े प्रश्न ‘क्या हम अकेले हैं? या फिर किसी अन्य ग्रह पर भी जीवन है?’ के जवाब की तलाश मनुष्य द्वारा अभी जारी है।

कई बार आकाश में दिखाई देने वाली अज्ञात चीजों (यू.एफ.ओ.) का सम्बन्ध भी दूसरे ग्रह से होने की बात कही जाती है, हालांकि इस पर भी अलग अलग वैज्ञानिकों का अलग अलग मत है, कई वैज्ञानिक इस अवधारणा को सिरे से खारिज करते रहे हैं जबकि ऐसे वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों की भी कमी नहीं है जो यह मानते हैं कि अन्य ग्रहों पर भी जीवन है और वहां के लोग (एलियंस) यू.एफ.ओ. के जरिये धरती पर आते रहते है।

यू.एफ.ओ. देखने का दावा करने वालों के अनुसार, अधिकतर मामलों में इनका आकार डिस्क या तश्तरीनुमा होने के कारण इन्हें “उड़नतश्तरी” भी कहा जाता है। इसके आलावा इनका आकार त्रिभुजाकार, वलयाकार, शंकुनुमा, गोलाकार आदि भी बताया जाता है। अधिकतर गवाहों के अनुसार इनकी गति बहुत तेज, बिना किसी आवाज के साथ, अपनी धुरी पर घूमते हुए, विशेष प्रकार की रोशनी के साथ, जिग-जेग, सीधे या वृत्ताकार दिशा में गति करते हुए या कई बार लम्बे समय तक एक ही जगह पर मंडराते हुए भी देखे गए हैं। कई मामलों में इनके बाहरी आवरण पर तेज प्रकाश भी देखा गया है।

‘‘दूसरे ग्रह पर जीवन होने की बात से मैं इनकार नहीं करती, लेकिन मैंने कोई एलियंस नहीं देखे।’’
sunita-viliyam
‘सुनीता विलियम्स
भारतीय मूल की अंतरिक्षयात्री जो की अंतरिक्ष में 195 दिन बिता चुकी है.

अमेरिका, कनाडा, इंगलैंड, स्वीडन आदि कई देशों द्वारा अधिकारिक तौर पर यू.एफ.ओ. आधारित घटनाओं पर कई अध्ययन किये गए पर सभी के द्वारा इनके अस्तित्व को नकार दिया गया और अधिकतर यही कहा गया कि लोगों द्वारा मानव निर्मित या प्राकृतिक चीजों/घटनाओं को देखकर यू.एफ.ओ. समझ लिया गया। हालाकिं इन अध्ययनों के दौरान कई ऐसे मामले भी सामने आए जिनको मानव-निर्मित वस्तु या प्राकृतिक घटनाओं के रूप में परिभाषित नहीं किया जा सका परन्तु अधिकतर मामलो में यू.एफ.ओ. की पहचान आई.एफ.ओ. के तौर पर कर ली गयी। पश्चिमी देशों द्वारा यू.एफ.ओ. की अवधारणा को नकारने के बावजूद इन्ही देशों में ैम्ज्प्ए
डन्थ्व्छ आदि की तरह कई एसी संस्थाएं हैं जो कि अन्य ग्रहों पर जीवन की तलाश एवं यू.एफ.ओ. आधारित दावों का अन्वेंषण करती है और एलियंस-यू.एफ.ओ. की अवधारणा को तार्किक रूप से सिद्ध करने की कवायद में जुटी है। भारत सहित कई अन्य देशों जैसे अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, रूस, स्वीडन, बेल्जियम, रोमानिया, स्कॉटलैंड, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, चिली, जापान, चीन, न्यूजिलेंड आदि कई देशों में लोगों द्वारा यू.एफ.ओ. देखे जाने के मामले सामने आते रहे हैं और इन मामलों में यू.एफ.ओ. को केवल आम लोगों द्वारा ही नहीं देखा गया बल्कि सेना के जवान, अधिकारी, पायलट, पुलिस अधिकारी, छात्रों, मीडिया-कर्मियों आदि के द्वारा भी देखे जाने के दावे होते रहे हैं। कई मामलांे में तो एक से अधिक संख्या में भी एक ही यू.एफ.ओ. को देखे जाने की बात आती रही है वहीं कई बार शहर के कई लोगांे द्वारा अलग अलग स्थानों से एक ही समय पर किसी यू.एफ.ओ. को देखे जाने के किस्से भी सामने आये हैं। शहर, गाँव आदि के साथ साथ मैदान, रेगिस्तान, जंगल, पहाड़, समुद्र, नदी, तालाब आदि स्थानों पर भी यू.एफ.ओ. देखे जाने की खबरें आती रही है, इसके अलावा मिलिट्री एरिया, एयरपोर्ट, अन्तराष्ट्रीय सीमाओं, परमाणु बिजली घरों आदि के आसपास भी इन उड़नतश्तरियों के देखे जाने की खबरें भी सामने आती रहती है।
भारत में भी यू.एफ.ओ. देखे जाने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इनकी संख्या में काफी तेजी से वृद्धि हुई है जिसका एक मुख्य कारण लोगों में आयी जागरूकता एवं मीडिया का बढता प्रभाव भी हो सकता है जिसके कारण लोग अब एसी घटनाओं को अधिक प्रचारित करने लगे हैं। भारतीय मूल की ‘सुनीता विलियम्स’ जो की अंतरिक्ष में 195 दिन बिता चुकी है, ने भी दिल्ली में स्कूली बच्चों के एक कार्यक्रम में कहा था कि ‘‘दूसरे ग्रह पर जीव होने की बात से मैं इनकार नहीं करती, लेकिन मैंने कोई एलियंस नहीं देखे।’’

 

एलियन-यू.एफ.ओ. बहुत ही दिलचस्प विषय होने के कारण इन विषयों पर कई फिल्मे, उपन्यास, टीवी सीरियल भी बन चुके हैं। कोई मिल गया, कृष, इंडिपेंडेंस डे, स्टार ट्रैक, मेन इन ब्लैक (एम. आई. बी.), द प्लेनेट ऑफ द एप्स, एलियन वर्सेज प्रिडेटर, वॉर ऑफ द वर्ल्ड्स, ट्रांसफॉरमर्स, रेस टू माउन्टेन विच, ई.टी. जैसी तमाम हॉलीवुड एवं बॉलीवुड फिल्में बन चुकी हैं।

अभी तक किये गए यू.एफ.ओ. आधारित अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि अधिकतर मामलों में लोगों ने मानव निर्मित, प्राकृतिक या अन्य ज्ञात वस्तुओं या आकाश में होने वाली कुछ विशेष प्रकार की घटनाओं को ही यू.एफ.ओ. मान लिया। उदाहरण के तौर पर रात के समय घने बदलों में हो रहे सूर्य किरणों का परावर्तन, मौसम निगरानी के लिए छोड़े गए गुब्बारों, मिसाइल परीक्षण, पेरासूट, कृत्रिम उपग्रहों के सोलर पेनलों से परावर्तित होने वाली सूर्य किरणों, रात के समय कुछ बड़े आकार में दिखाई देने वाले ग्रहों आदि को ही यू.एफ.ओ. समझ लिया जाता है। इसके आलावा कई मामलों में लोगों की धार्मिक मान्यताओं, भ्रम, शरारत, गलतफहमी, अफवाह या अन्धविश्वास जैसी वजहें सामने आई। अध्ययनों में अधिकतर मामलों में यूएफओ की पहचान बाद में आई.एफ.ओ. (आईडेन्टीफाइड फ्लाइंग ऑब्जेक्ट) के तौर पर कर ली गयी. हालाकिं इन अध्ययनों में कुछ ऐसे मामले
एलियन यू.एफ.ओ. - रहस्यमयी रहस्य
भी सामने आये जो कि वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों के लिए भी अज्ञात रहे हैं और जिनकी कोई व्याख्या नहीं की जा सकी और किसी निश्चित परिणाम पर नहीं पहुंचा जा सका।

एडगर मिशेल

नासा के अंतरिक्षयात्री ने भी स्वीकारा - एलियंस होते हैं.

नासा के एक अंतरिक्षयात्री ‘एडगर मिशेल’, जो कि चाँद पर कदम रखने वाले छटे इन्सान हैं, ने भी स्वीकारा है कि एलियंस होते हैं और यू.एफ.ओ. सम्बन्धित बातें सही है। रेडियो पर दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि नासा में उनके कार्यकाल के दौरान कई बार एसा हुआ है कि एलियंस ने नासा से संपर्क स्थापित किया हो, पर सरकार के दबाव के कारण इस सच को सबके सामने नहीं लाया गया, लेकिन अब धीरे धीरे यह बात सामने आ रही है। साथ ही एडगर मिशेल का यह भी कहना है कि वो(परग्रही) तकनीकी दृष्टि से हमसे आगे हैं परन्तु उन्हें अपना दुश्मन मानना गलत है। उनका कहना है कि “मैं उन खुशकिस्मत लोगों में से हूँ जिन्हें एलियंस के धरती पर आने की हकीकत के बारे में बताया गया।”

अभी तक के अध्ययनों में पृथ्वी के आलावा किसी अन्य ग्रह पर जीवन होने के कोई पुख्ता प्रमाण/सबूत नहीं मिले हैं और यह सिद्ध नहीं हो सका है कि धरती के आलावा भी अन्यत्र कहीं बुद्धिजीवी रहते हैं अर्थात अगर किसी अन्य ग्रह पर बुद्धिजीवी नहीं रहते हैं तो यह कैसे संभव है कि अन्य ग्रह के लोग किसी यू.एफ.ओ., उड़नतश्तरी या अंतरिक्षयान में बैठकर पृथ्वी पर आ सके।

हालांकि एलियन-यू.एफ.ओ. की अवधारणा का समर्थन करने वाले विशेषज्ञों का इस विषय पर मत है कि यह अंतरिक्ष अनन्त है और बहुत कम ऐसे ग्रह और तारामंडल हैं जहां तक हमारे अंतरिक्षयानों या दूरबीन आदि यंत्रो द्वारा उन ग्रहों-पिंडो तक हमारी नजर पहूंच पाई है और वैसे भी अभी हमारी अन्य ग्रहों पर जीवन की खोज जारी है, अतः पुख्ता तौर पर यह भी नहीं कहा जा सकता कि किसी अन्य ग्रह पर जीवन हो ही नहीं सकता। अतः यह भी संभव है कि कहीं अन्यत्र जीवन तो है लेकिन हम अभी वहां तक पहूंच नहीं पाए हैं।
सन् 1961 में फ्रैंक ड्रेक नाम के रेडियो वैज्ञानिक ने एक समीकरण बनायी जिसका मुख्य उद्देश्य यह अनुमान लगाना था कि कितने ग्रहों पर बुद्धिजीवीयों के होने की सम्भावना है, इसे ‘ड्रेक समीकरण’ के नाम से जाना जाता है। प्राप्त तथ्यों के आधार पर इस समीकरण की सहायता से यह अनुमान लगाया गया कि हमारी आकाशगंगा में करीब 10,000 ग्रहों पर जीवन होने की सम्भावना हो सकती है। 2001 में वैज्ञानिकों द्वारा इस समीकरण में कुछ और सुधार किये गए और अनुमान लगाया गया कि हजारों नहीं लाखों ग्रहों पर जीवन की संभवना हो सकती है।

यू.एफ.ओ. देखे जाने के बहुत सारे दावे होते रहे हैं लेकिन आज तक किसी बाहरी अंतरिक्षयान से सम्बंधित कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। अभी तक जितने भी फोटोग्राफ या वीडियो मिले हंै वो या तो रात के समय के हैं और उनमें सिर्फ रोशनी दिखाई दे रही है या फिर बहुत ही धुंधले हैं। और कई मामलो में दावेदारों द्वारा दिए गए फोटोग्राफ/वीडियो नकली पाए गए जिन्हें कि कम्प्यूटर द्वारा एडिट करके बनाया गया था।

लेकिन एलियन-यू.एफ.ओ. अवधारणा का समर्थन करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि हर साल हजारों लोगों द्वारा यू.एफ.ओ. देखे जाने के दावे किये जाते हैं, हो सकता है कि अधिकतर मामलों में लोगों द्वारा ज्ञात चीजों को ही अज्ञानता-वश या जानकारी के अभाव में गलती से यू.एफ.ओ. समझ लिया जाता है लेकिन यू.एफ.ओ. देखने का दावा करने वालों में आम लोगों के साथ साथ सेना-अधिकारी, पायलट, मीडिया-कर्मी, वैज्ञानिक आदि भी शामिल हैं और इनके द्वारा इस प्रकार की गलती की संभावनाएं बहुत ही कम है कि किसी मानव निर्मित वस्तु या प्राकृतिक घटना को यू.एफ.ओ. समझ लें, फिर भी कुल मिलाकर यदि यह कहा जाये कि यू.एफ.ओ. देखे जाने के अधिकतर मामलों में से ज्यादातर फोटो नकली पाए जाते हैं या इनकी पहचान आई.एफ.ओ. के रूप में कर ली जाती है फिर भी कई मामले ऐसे भी सामने आते रहे हैं जो कि अज्ञात रह जाते हैं और यदि इन अज्ञात मामलों में से कोई एक दावा भी सही होता है तो इसका अर्थ यह हुआ कि पृथ्वी के अलावा भी किसी दूसरे ग्रह पर बुद्धि जीवी रहते हैं और वो धरती पर आते रहते हैं।

कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि हमारे निकटतम तारामंडल तक पहूंचने में मनुष्य को लगभग 75 वर्ष लग जायेंगे, और इतना ही समय वहां से किसी को यहां तक आने में लग जायेगा, अतः अपने जीवन काल में यहां से वहां या वहां से यहां तक पहूंच पाना संभव नहीं है।

लेकिन यह भी हो सकता है कि उनके पास हमसे कहीं अधिक उन्नत तकनीक हो और उन्हें यहाँ तक आने में इतना समय नहीं लगे जितना कि हम मनुष्य अनुमान लगा रहे हैं, साथ ही यह भी संभव है कि वो खुद आने की बजाय यू.एफ.ओ. के रूप में रोबोटिक यान भेजते हों।

व प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार उड़नतश्तरियों के आकार, गति एवं व्यवहार के आधार पर जो विशेषताएं बताई जाती हंै उसके अनुसार उनकी संचालन प्रक्रिया एवं तकनीक मनुष्यों द्वारा काम में ली जाने वाली तकनीक से बहुत अलग एवं उन्नत प्रतीत होती है। अतः इस बात को इस तरह भी जोड़ा जाता है कि उड़नतश्तरीयां अन्य ग्रह के ग्रह्वासियों के द्वारा भेजे गए यान हैं।
एलियन-यू.एफ.ओ. से सम्बंधित विषयों पर लम्बे समय से कई वैज्ञानिक शोधकार्य होते रहे हैं और अभी भी जारी हैं लेकिन आज भी कई अनसुलझे रहस्य हैं जिनको सुलझाना अभी बाकी है जैसे कि क्या पृथ्वी के आलावा किसी अन्य ग्रह पर भी जीवन है ? यदि कहीं अन्यत्र भी बुद्धि-जीवी एलियन रहते हैं तो क्या हम वहां तक पहूंच सकते हैं या उनसे संपर्क स्थापित कर सकते हैं ? क्या दूसरी दुनिया के लोग पृथ्वी पर आते रहते हैं ? क्या उनके पास हमसे बेहतर तकनीक है ? अगर कहीं अन्यत्र जीवन है और वो यहाँ धरती पर आते रहते हैं तो उनका यहां पृथ्वी पर आने का क्या उद्देश्य है ? उनके अंतरिक्षयानों की क्या तकनीक है जो इतनी दूर, इतनी तेज गति के साथ आ-जा सकते हंै ? कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि एलियन-यू.एफ.ओ. सम्बंधित विषय आज भी एक रहस्यमयी रहस्य बने हुए हैं जिनको सुलझाने के प्रयास अभी जारी हैं।

नोट: यह लेख विज्ञान-प्रगति में प्रकाशित अंक से लिया हुआ है. (लेखक: UFOlogist रामकृष्ण वैष्णव)